राजस्थान यूनिवर्सिटी में आयोजित हुई विचार गोष्ठी, संस्कृति में सिखों के चित्रण पर हुई चर्चा

राजस्थान विश्वविद्यालय के श्री गुरू गोविन्द सिंह चेयर फॉर नेशनल इंटीग्रेशन एण्ड सिख स्टडीज, इतिहास एवं भारतीय संस्कृति विभाग एवं संग्रहालय विज्ञान एवं संरक्षण केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया. इस विचार गोष्ठी में दृश्य संस्कृति में सिक्खों के चित्रण पर चर्चा की गई. गोष्ठी की चेयरपर्सन प्रोफेसर संगीता शर्मा ने गोष्ठी का परिचय देते हुए उसके उद्देश्यों से अवगत करवाया. 

रूक्ष्मणि कुमारी रही मुख्य अतिथि

विचार गोष्ठी की मुख्य अतिथि सुश्री रूक्ष्मणि कुमारी ने कहा कि हमारी ऐतिहासिक विरासतें आज विदेशी संग्रहालयों की शोभा बढ़ा रही है जिन्हें वापस देश में लाने की मुहिम चलानी चाहिए. संग्रहालय विज्ञान एवं संरक्षण केन्द्र की निदेशक डॉ. नीकी चतुर्वेदी एवं इतिहास विभाग की जिज्ञासा मीना ने संग्रहालयों की कलाकृतियों एवं चित्रों के माध्यम से पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह की कीर्ति एवं जीवन के पक्षों को उजागर करते हुए रोचक प्रस्तुति दी. उनकी प्रस्तुति ने यह स्थापित किया कि किस प्रकार युग विशेष की वस्तुएं (जैसे उनका कोहिनूर हीरा, तलवार, स्वर्ण सिंहासन, पोशाक, सिक्के दरबार चित्र आदि) इतिहास में गहन अंतर्दृष्टि प्रदान कर सकती है. डॉ नीकी चतुर्वेदी ने बताया कि महाराजा रणजीत सिंह को पंजाब के नेपोलियन बोनापार्ट एवं शेर-ए-पंजाब के नाम से भी संबोधित किया जाता है.

विचार गोष्ठी में पुस्तकों का किया गया विमोचन

इस अवसर पर चार पुस्तकों जिज्ञासा राष्ट्र की सृजन यात्रा, ट्राइबल फोक एंड नोमेडिक  कम्युनिटीज इन राजपूताना स्टेटस अरबनाइजेशन इन राजस्थान का विमोचन किया गया है. गोष्ठी में बीज वक्तव्य देते हुए डॉ. अविनाश कुमार ने सिनेमा में सिक्खों का वर्णन विषय के माध्यम से सिक्खों की क्रांतिकारी देश प्रेमी, मसखरा, प्रेमी आदि विविध भूमिकाओं को दर्शाने वाली फिल्मों के कुछ चुनिंदा दृश्य दिखाए. उन्होंने आगे बताया कि भगत सिंह एवं ऊधम सिंह जैसे क्रांतिकारी सरदारों की भूमिका सिनेमा में प्रारम्भ से अब तक लोगों द्वारा सराही गयी हैं.

जसबीर सिंह रहे विशिष्ट अतिथि

विशिष्ट अतिथि श्री जसबीर सिंह ने रणजीत सिंह एवं भगत सिंह के बारे में बोलते हुए बताया कि उन्होंने देश की एकता व सौहार्द के लिए अथक प्रयास किए थे. उन्होंने आगे बताया कि रणजीत सिंह द्वारा स्वर्ण मंदिर के निर्माण में जितना धन दान किया गया उतना ही धन काशी विश्वनाथ मंदिर में भी दान किया गया, जो कि उनकी धार्मिक सहिष्णुता का परिचायक है. 

कुलपति प्रो. राजीव जैन ने की कार्यक्रम की अध्यक्षता

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. राजीव जैन ने कहा कि संवाद ही हमें जोड़े रखता है जो इन विचार गोष्ठियों से सम्भव है. इस गोष्ठी में विशिष्ट आमंत्रित अतिथि प्रो. एस. एल. शर्मा मंच पर उपस्थित थे. इस गोष्ठी में शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी सहित कुल 200 लोग उपस्थित रहे. डॉ. नीकी चतुर्वेदी ने गोष्टी में आए हुए सभी आगंतुकों का धन्यवाद ज्ञापित किया व कार्यक्रम का संचालन जिज्ञासा मीना ने किया.

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